रसायन विज्ञान (भाग-1)

रसायन विज्ञान (भाग-1)

रसायन विज्ञान (भाग: 1)

पदार्थों की प्रकृति एवं संगठन:

  • केमिस्ट्री शब्द की उत्पत्ति मिस्र के प्राचीन नाम कीमिया से हुई है कीमिया का शाब्दिक अर्थ “काला रंग” है|
  • संभवतः केमिस्ट्री शब्द का प्रयोग ‘मिस की कला’ के लिए किया जाता था।
  • एंटोनी लेवाईज़िएयर को आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक कहा जाता है।

 

  • अधिकांश तत्व ठोस के रूप में ही पाए जाते हैं कुछ तत्व द्रव के रूप में भी पाए जाते हैं।
  • उदाहरण- पारा, ब्रोमीन
  • कुछ तत्व गैसीय अवस्था में भी पाए जाते हैं। उदहारण-हाइड्रोजन, हीलियम, नाइट्रोजन, आक्सीजन, क्लोरीन|
  • सर्व प्रथम कृत्रिम रूप से बनाया गया तत्व टेक्नेटियम (Tc) था जिसे बर्कले ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में बनाया था।

 

रसायन विज्ञान की शाखाएं:

  • कार्बन रसायन (Organic Chemistry)-इसके अंतर्गत कार्बनिक यौगिकों का अध्ययन किया जाता है।
  • अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry)-कार्बन और उसके यौगिकों के अतिरिक्त अन्य सब तत्वों और यौगिकों का अध्ययन इस शाखा के अंतर्गत किया जाता है।
  • जीव रसायन (Bio Chemistry)-जीव जंतुओं और पेड़-पौधों में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं के अध्ययन का विषय जीव-रसायन है।
  • भौतिक रसायन (Physical Chemistry)- रसायन विज्ञान की प्रत्येक शाखा से सम्बंधित विभिन्न नियमों और सिद्धांतों, पदार्थों का परिवर्तन तथा उर्जा और पदार्थ के संबंधों का अध्ययन इसके अंतर्गत करते हैं।
  • औद्योगिक रसायन(Industrial Chemistry)-इसमें वस्तुओं की वृहद् मात्रा में औद्योगिक निर्माण की विधियों एवं नियमों का पालन किया जाता है।
  • कृषि रसायन (Agricultural Chemistry)-कृषि तथा उसके उपयोगी पदार्थों, उर्वरकों, खनिज लवणों आदि का अध्ययन इसके अंतर्गत किया जाता है।
  • नाभिकीय रसायन (Nuclear Chemistry)-इसमें परमाणु के नाभिक का संगठन, नाभिकीय अभिक्रियाएं समस्थानिकों व रेडियोधर्मी पदार्थों का ध्ययान किया जाता है।
  • वैश्लेषिक रसायन Analytical Chemistry)-इसके अंतर्गत पदार्थों की पहचान और उसके गुणात्मक व मात्रात्मक विश्लेषणों का अध्ययन किया जाता है।

यौगिक:

वह शुद्ध पदार्थ हैं जो दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनता है। जिसे दो या दो से अधिक सर्वथा भिन्न गुणों वाले अवयवों/तत्वों में विभक्त किया जा सकता है।             

  • उदाहरण- जल।

मिश्रण:

दो या दो से अधिक योगी को अथवा तत्वों को किसी भी अनिश्चित अनुपात में मिलाने पर प्राप्त पदार्थ मिश्रण कहलाता है मिश्रण समांगी (होमोजीनियस) तथा विषमांगी (हेट्रोजीनियस) प्रकार का हो सकता है।

  • उदहारण- वायु, समुद्री जल, पीतल।    
  • समांगी मिश्रण- चीनी का जल में विलयन, नमक का जल में विलयन।    
  • विषमांगी मिश्रण- धूलकण का हवा में मिश्रण, बालू का नमक में मिश्रण।    

अणु:  

किसी पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है उसमें उस पदार्थ के सभी गुण विद्यमान रहते हैं परंतु रासायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं ले सकता।    

  • उदाहरण: H2O, NaCl, CH4, H2

परमाणु:

किसी पदार्थ का वह संभव सूक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता परंतु रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है।

  • उदाहरण: H, N, O, C, K

आवर्त सारणी:

  1. रशियन वैज्ञानिक डीआई मंडलीफ द्वारा तत्वों के परमाणु भार को आधार मानकर तत्वों की आवर्त सारणी बनाई गई थी।
  2. मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु  भारो के आवर्त फलन होते हैं
  3.  ब्रिटिश वैज्ञानिक मोसले ने 1913 में तत्वों की परमाणु संख्या की खोज कि जो आधुनिक आवर्त सारणी का आधार बना।
  4. आधुनिक आवर्त सारणी में 7 आवर्त (क्षैतिज कतारें) एवं 18 वर्ग हैं जबकि मेंडलीफ की आवर्त सारणी में 7 आवर्त एवं 9 वर्ग थे।
  5. प्रत्येक आवर्त का प्रथम तत्व क्षार धातु तथा अंतिम तत्व कोई निष्क्रिय गैस होता है।
  6. पहले आवर्त का प्रथम सदस्य हाइड्रोजन है।
  7. आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों का धात्विक गुण कम होता जाता है एवं तत्व की रासायनिक क्रियाशीलता घटती है एवं बाद में बढ़ती है।
  8. आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत ऋणात्मकता का मान बढ़ता है।
  9. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्व के धात्विक गुण में वृद्धि, धातुओं की क्रियाशीलता में वृद्धि, अधातुओं की रासायनिक क्रियाशीलता में कमी, विद्युत ऋणत्मकता में कमी, आयनन विभव के मान में कमी एवं परमाणु के आकार में वृद्धि होती है।

धातुएं और उनके यौगिक:

ऐसे तत्व जो इलेक्ट्रॉन को त्याग कर धनायन प्रदान करते हैं धातु कहलाते हैं| आधुनिक आवर्त सारणी में सभी धातु तत्व बायीं ओर तथा मध्य में स्थित हैं| आवर्त सारणी में जो तत्व बिल्कुल भाइयों और हैं उनमें धातुओं के गुण सबसे अधिक पाए जाते हैं| प्राचीन काल में सिर्फ आठ धातु  ही ज्ञात थी जिन्हें प्रागैतिहासिक धातु की संज्ञा दी जाती है, उदाहरण- कार्बन सोना, चांदी,  टिन, शीशा, लोहा, पारा, और एंटीमनी| वर्तमान में ज्ञात धातुओं की कुल संख्या 90 है|

मिश्र धातुएं:

  1. दो या दो से अधिक धातुओं को एक निश्चित अनुपात में मिलाने से जो नई धातु प्राप्त होती है उन्हें हम मिश्र धातु में कहते हैं|
  2. जस्ता (Zinc) एक तत्व है जिसका उपयोग लोहे के प्रतिरक्षण में किया जाता है लोहे को जंग विरोधी बनाने के लिए जिससे कि पालिश की जाती है।
  3. एल्युमिनियम धातु से बनाई गई मिश्रधातु को हवाई जहाज तथा रेल के डिब्बों में पुर्जे बनाने के काम में लाया जाता है अलमुनियम हल्की होती है तथा इसमें जंग नहीं लगता।
  4. जब पारा किसी धातु से मिलकर मिश्र धातु बनाता है तो उसे अमलगम कहते हैं।
  5. लोहे से अमलगम नहीं बनाया जा सकता जस्ता मैग्नीशियम एवं तांबे को पारे से मिलाकर अमलगम बनाया जाता है।
  6. पीतल में 68% से 71% तक तांबा एवं सतीश जस्ता होता है।
  7. फोटोग्राफी में सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) का अनिवार्य रूप से प्रयोग होता है।
  8. वायु में हाइड्रोजन सल्फाइड की उपस्थिति के कारण पीतल का रंग हवा में फीका पड़ जाता है।
  9. निकिल की उपस्थिति के कारण स्टैंडर्ड स्टील अचुंबकीय हो जाता है स्टील को अधिक कठोर बनाने के लिए कार्बन की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
  10. स्टैंडर्ड स्टील में आयरन 89.4 %, क्रोमियम 10%, मैग्नीशियम .35%, कार्बन 0.25% एवं  निकिल 0.8% होता है।
  11. टांका या सोल्डर में सीसा 60% एवं 32% होता है।
  12. जर्मन सिल्वर या निकिल सिल्वर में तांबा 50%, जस्ता 35% या निकिल 15% होता है।
  13. कांसा मैं 18% तांबा एवं 12% उपस्थित होता है।
  14. इनोडाइजिंग एक वैद्युत रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा विद्युत का पृष्ठ टिकाऊ एवं जंग रोधी बनाया जाता है इस प्रक्रिया में एल्युमीनियम ऑक्साइड की परत का निक्षेपण होता है।
  15. जंग रहित लोहा बनाने के लिए क्रोमियम मिश्रित किया जाता है जंग लगने पर लोहे का भार बढ़ता है।

शेष अगले भाग में-

हमारे फेसबुक ग्रुप से जुड़ने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें!

 

हमारे YouTube चैनल से जुड़ने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें!