भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017 (INDIA STATE OF FOREST REPORT 2017)

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017 (INDIA STATE OF FOREST REPORT 2017)

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017

केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 फरवरी 2018 को भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017 जारी की। इसकी शुरूआत 1965 में, वन संसाधन निवेश पूर्व सर्वेक्षण संस्थान के रूप में एफ-ए-ओ-/यू-एन-डी-पी-/भारत सरकार परियोजना के अन्तर्गत हुई। सूचनाओं में परिवर्तन होने के परिणामस्वरूप वन संसाधनों के निवेश पूर्व सर्वेक्षण के क्रियाकलापों के कार्य क्षेत्र में विस्तार होने से 1981 में इसका भारतीय वन सर्वेक्षण के नाम से पुनर्गठन किया गया।

जहाँ आज के समय में समूचे विश्व में वनों की स्थिति गम्भीर चिंता का विषय है, वहां भारत के लिये इस रिपोर्ट में जारी आकड़े संतोषजनक दिखते प्रतीत हो रहे हैं।

केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 12 फरवरी 2018 को जारी भारत वन स्थिति रिपोर्ट- 2017 में भारत में महत्वपूर्ण बढोतरी दर्ज़ हुई है। जारी रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश ,कर्नाटक और केरल में वन क्षेत्रों में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज हुई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में है। भारत के भू- भाग का 24.4 प्रतिशत हिस्सा वनों और पेड़ों से घिरा है, हालांकि यह विश्व  के कुल भू- भाग का केवल 2.4 प्रतिशत हिस्सा ही है ऐसा तब है जबकि बाकी 9 देशों में जनसंख्या घनत्व 150 व्यक्ति/वर्ग किलोमीटर है और भारत में यह 382 व्यक्ति/वर्ग किलोमीटर है और इन पर 17 प्रतिशत मनुष्यों  की आबादी और मवेशियों की 18 प्रतिशत संख्या  की जरूरतों को पूरा करने का दवाब है। संयुक्तत राष्ट्रो खाद्य एवं कृषि संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया के उन 10 देशों में 8 वां स्थान दिया गया है जहां वार्षिक स्तर पर वन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 1987 से भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट को द्विवार्षिक रूप से भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह इस श्रेणी की 15वीं रिपोर्ट है।

भारत वन स्थिशति रिपोर्ट 2017 के अनुसार ताजा आकलन यह दिखाता है कि देश में वन और वृक्षावरण की स्थिभति में 2015 की तुलनात्मक रूप में 8021 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। उन्होंरने कहा कि इसमें 6,778 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि वन क्षेत्रों में हुई है, जबकि वृक्षावरण क्षेत्र में 1243 वर्ग किलोमीटर की बढोत्तटरी दर्ज की गई है। घने वनों का क्षेत्र बढ़ने से खुले वनों का क्षेत्र भी बढ़ा है। घने वन क्षेत्र वायुमंडल से सर्वाधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साकइड सोखने का काम करते हैं। इस रिपोर्ट में वन एवं वन संसाधनों के आकलन के लिये भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह रिसोर्स सेट-2 से प्राप्तए आँकड़ों का इस्तेकमाल किया गया है, रिपोर्ट तैयार करने के दौरान 1800 स्थाेनों का व्यसक्ति गत रूप से और वैज्ञानिक पद्धति से सर्वेक्षण किया गया। 

राज्यों में वनों की स्थिति के राज्यवार आकड़ों के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। 

उद्देश्य:

  1. द्विवार्षिक वन स्थिति रिपोर्ट तैयार करना, देश के तात्कालिक वनावरण आकलन उपलब्ध करना एवं उसमें होने वाले परिवर्तन का अनुश्रवण करना।
  2. वन एवं गैर-वनीय क्षेत्र में इन्वेंट्री करवाना एवं वन वृक्ष संसाधनों का डाटाबेस विकसित करना।
  3. हवाई छाया-चित्रों का उपयोग कर थीमेटिक मानचित्र तैयार करना।

वनीकरण की रणनीति:

  • वन संसाधनों पर स्थानीय डाटाबेस एकत्रीकरण, संकलन, भंडारण एवं प्रसारण हेतु एक नोडल एजेन्सी के रूप में कार्य करना।
  • संसाधनों का सर्वेक्षण, सुदूर संवेंदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी-आई-एस-) आदि से संब तकनीकों के प्रयोग पर वानिकी कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन करना।
  • एफ-एस-आई- में अनुसंधान एवं अवसंरचना के विकास को सशक्त बनाना तथा अनुप्रयुक्त वन सर्वेक्षण तकनीको पर अनुसंधान करना।

भारत वन स्थिाति रिपोर्ट 2017 (India State of Forest Report-ISFR) के प्रमुख आकड़े:

देश में आच्छादित कुल क्षेत्रफल (वृक्ष और वन)     802088 वर्ग किमी. (24.39%)

भौगोलिक क्षेत्रफल में का हिस्सा (वन)

708273 वर्ग किमी. (21.54%)

क्षेत्रफल में कुल वृद्धि (वनावरण और वृक्षावरण)

8021 वर्ग किमी. (1%)

आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि (वृक्ष)

1243 वर्ग किमी.

आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि (वन)

6778 वर्ग किमी.

भौगोलिक क्षेत्रफल में हिस्सा (वन और वृक्षावरण)

24.39%

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वन क्षेत्र के हिसाब से राज्यवार आकड़े:

राज्य

वन क्षेत्र (वर्ग किलोमीटर)

मध्‍य प्रदेश

77414 (प्रथम  स्थान)

अरूणाचल प्रदेश

66964 (दूसरा स्थान)

छत्‍तसीगढ

55547 (तीसरा स्थान)

वन क्षेत्र में वृद्धि वाले शीर्ष राज्य (वर्ग किलोमीटर) आकड़े:

राज्य

वन क्षेत्र में वृद्धि (वर्ग किलोमीटर)

आंध्र प्रदेश

2141

कर्नाटक

1101

केरल

1043

प्रतिशत के आधार राज्यवार आकड़े (कुल भू- भाग की तुलना में):

राज्य

वनाच्‍छादन (प्रतिशत)

लक्षद्वीप

90.33 % (प्रथम  स्थान)

मिजोरम

86.27 % (दूसरा स्थान)

अंडमान निकोबार द्वीप समूह

81.73 % (तीसरा स्थान)

महत्वपूर्ण बिन्दु:

  • रिपोर्ट के ताजा आंकलन के अनुसार देश के 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत भू- भाग वनों से घिरा है। 
  • इनमें से 7 राज्यों  और संघ शासित प्रदेशों जैसे मिजोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नगालैंड, मेघालय और मणिपुर का 75 प्रतिशत से अधिक भू- भाग वनाच्छादित है।
  • त्रिपुरा, गोवा, सिक्किम, केरल, उत्तराखंड, दादर नागर हवेली, छत्तीसगढ और असम का 33 से 75 प्रतिशत के बीच का भू- भाग वनों से घिरा है। 
  • देश का 40 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र 10 हजार वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक के 9 बड़े क्षेत्रों के रूप में मौजूद है।
  • भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017 के अनुसार देश में कच्छ वनस्पति का क्षेत्र 4921 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें वर्ष 2015 के आकलन की तुलना में कुल 181 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। 
  • कच्छ  वनस्पति वाले सभी 12 राज्योंं में कच्छ  वनस्पति क्षेत्र में पिछले आंकलन की तुलना में सकारात्म‍क बदलाव देखा गया है। 
  • कच्छ वनस्पति जैव विविधता में समृद्ध होती है जो कई तरह की पारिस्थि‍तिकीय आवश्यतकताओं को पूरा करती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार देश में वाह्य वन एवं वृक्षावरण का कुल क्षेत्र 582.377 करोड़ घन मीटर अनुमानित है, जिसमें से 421.838 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के अंदर है, जबकि 160.3997 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के बाहर है। 
  • पिछले आंकलन की तुलना में बाह्य एवं वृक्षावरण क्षेत्र में 5.399 करोड़ घन मीटर की वृद्धि हुई है, जिसमें 2.333 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के अंदर तथा 3.0657 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के बाहर हुई है। इस हिसाब से यह वृद्धि पिछले आंकलन की तुलना में 3 करोड़ 80 लाख घन मीटर रही।
  • रिपोर्ट में देश का कुल बांस वाला क्षेत्र 1.569 करोड़ हेक्टेयर आकलित किया गया है। वर्ष 2011 के आकलन की तुलना में देश में कुल बांस वाले क्षेत्र में 17.3 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। बांस के उत्पादन में वर्ष 2011 के आकलन की तुलना में 1.9 करोड़ टन की वृद्धि दर्ज हुई है। 
  • सरकार ने वन क्षेत्र के बाहर उगाई जाने वाली बांस को वृक्षों की श्रेणी से हटाने के लिए हाल ही में संसद में एक विधेयक पारित किया है। इससे लोग निजी भूमि पर बांस उगा सकेंगे जिससे किसानों की आजीविका बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे देश में हरे- भरे क्षेत्रों का दायरा भी बढ़ेगा और कार्बन सिंक बढाने में भी मदद मिलेगी। 
  • रिपोर्ट में वनों में स्थिमत जल स्रोतों का 2005 से 2015 के बीच की अवधि के आधार पर आकलन किया गया है, जल स्रोतों में आकलन अवधि के दौरान 2647 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज हुई है, इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश शीर्ष राज्य हैं।