राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति (NATIONAL AGRICULTURAL PRICE POLICY)

राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति (NATIONAL AGRICULTURAL PRICE POLICY)

राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति (National Agricultural Price Policy)

जाने क्या है राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति:

उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को सुरक्षा प्रदान करना अर्थात राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति का उद्देश्य जहां किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाकर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्यान्नों की उपलब्धता कराना है।

उद्देश्य:

  1. बाजार कीमतों को स्थिर रखने हेतु बफर स्टॉक का निर्माण करना।
  2. खाद्यान्न उत्पादन में संतुलित वृद्धि को प्रोत्साहन।
  3. कृषि उत्पादों में मूल्य की स्थिरता को बनाये रखना।
  4. उपभोगताओं को उचित मूल्य पर खाद्यान्नों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना।

मूल्यों (कृषि उत्पाद) को विनियमित करने हेतु सरकार द्वारा अपनी जाने वाली नीति:

न्यूनतम समर्थन मूल्य (मिनिमम सपोर्ट प्राइस)

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों द्वारा बेचे जाने वाली अनाज की संपूर्ण मात्रा को सरकार क्रय करने को परिबद्ध होती है, यह किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम गारंटी मूल्य प्रदान करती है।
  • किसानों को फसल का उचित लाभप्रद मूल्य सुनिश्चित कराने हेतु केंद्र सरकार प्रतिवर्ष रवि तथा खरीफ की प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य 23 महत्वपूर्ण फसलों के लिए घोषित किए जाते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा सरकार द्वारा फसल की बुवाई से पूर्व ही कर दी जाती है।

वर्ष 2017- 18 की खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य:

  

खरीफ़ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (रु./कु.)

 फ़सल

2013-14

2014-15

2015- 16

2016- 17

वृद्धि

2017-2018

 धान (सामान्य)

1310

1735

1410

1470

80

1550

 धान (ग्रेड ए)

1345

1410

1450

1510

80

1590

 अरहर/तुअर

4300

4400

4625

5050

400

5450

 उड़द

4300

4250

4625

5000

400

5400

 मूंग

4500

4000

4850

5225

350

5575

 बाजरा

1250

1250

1275

1330

95

1425

 मक्का

1310

1310

1325

1365

60

1425

 कपास मीडियम

3700

3750

3800

3860

160

4020

 कपास लम्बा

4000

4050

4100

4160

160

4320

 सोयाबीन पीला

2560

2560

2600

2775

275

 3050

 सूर्यमुखी

3700

3750

3800

3950

150

4100

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की समिति की गत दिनों हुई बैठक में 2017-18 की खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी गई।
  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agriculture Cost and Price : CACP) की सिफारिश पर अन्य फसलों की तरह सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में गत वर्ष की तुलना में 275 रु. बढ़ाकर इसका मूल्य 3050 रु. प्रति क्विं. किया गया है।
  • कपास के एमएसपी में 160 रु. की वृद्धि की गई है जिससे इसका मूल्य 4320 हो गया है। सूरजमुखी का 150 रु. बढ़ाकर 4100 रु. प्रति क्विंटल किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि खरीफ फसलों के लिए फसल वर्ष एवं विपणन वर्ष एक ही होता है जबकि रबी फसलों के लिए यह अलग-अलग होता है।

वर्ष 2016- 17 की रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य:

 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (रु./कु.)

 फ़सल

वर्ष 2016-17

वर्ष 2017-18

वृद्धि

 गेंहूँ

1623

1735

110

 जौ

1325

1410

85

 चना

4000

4400

400

 मसूर

3950

4250

350

 सरसों/रैपसीड

3700

4000

300

रबी फसल:

वे फसलें जिनकी बुआई जाड़े के मौसम में (मध्य नवंबर के आस-पास) की जाती है और कटाई बसंत के समय लगभग अप्रैल/मई में की जाती है।

  • हाल ही में सरकार ने वर्ष 2018-19 में विपणित की जाने वाली वर्ष 2017-18 मौसम की सभी रबी फसलों के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्यों’ (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी। देश में दलहनों एवं तिलहनों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने चने के लिए 150 रुपये प्रति क्विंटल तथा मसूर (Lentil), रेपसीड/सरसों एवं कुसुम्भ के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनसकी घोषणा की है। यह बोनस घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त देय है।
  • गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1735 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि विगत वर्ष यह 1625 रुपये निर्धारित था।
  • जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी 85 रुपये की वृद्धि करते हुए विगत वर्ष के मूल्य 1325 रुपये से बढ़ाकर 1410 रुपये निर्धारित किया गया है।
  • चना के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 400 रुपये, मसूर के मूल्य में 300 रुपये, रेपसीड/सरसों के मूल्य में 300 रुपये तथा कुसुम्भ के मूल्य में 400 रुपये की वृद्धि करते हुए क्रमशः 4400 रुपये, 4250 रुपये, 4000 रुपये तथा 4100 रुपये निर्धारित किया गया है।
  • जबकि विगत वर्ष इनके मूल्य क्रमशः 4000 रुपये, 3950 रुपये 3700 रुपये तथा 3700 रुपये निर्धारित किए गए थे।
  • सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 2 मुख्य फसल ऋतुओं रबी एवं खरीफ के दौरान प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाती है।न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागू करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) केंद्रीय नोडल एजेंसी है।

जानिए कैसे होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण:

फसल की लागत तथा मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण होता है इसके निर्धारण निम्न क्षेत्रों पर विश्लेषण के आधार पर किया जाता है।

  • उत्पादन लागत
  • कुल मांग और आपूर्ति
  • अंतर फसलीय कीमत समता
  • कृषि एवं कृषि क्षेत्रों के बीच व्यापार शर्तें
  • अर्थव्यवस्था पर मूल्य निति के संभावित प्रभाव
  • घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय कीमतें

◆ निकासी मूल्य (ISSUE PRICE):

निकासी मूल्य वह मूल्य है जो भारतीय खाद्य निगम राज्यों या राज्य अधिकृत एजेंसियों को अनाज देने के बाद प्राप्त करता है अर्थात वह मूल्य, जिस पर केंद्र सरकार केंद्रीय भंडारों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित मूल्य की दुकानों/मिलों को अनाज का निर्गमन करती है।

◆ अधिप्राप्त मूल्य या वसूली मूल्य (PROCUREMENT PRICE):

अधिप्राप्त मूल्य या वसूली मूल्य वह मूल्य है जिसपर सरकार अनाज क्रय करती है।

यह कीमतें केन्द्र सरकार द्वारा फ़सल की कटाई के समय करती है।

यह मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर या अधिक हो सकता है।

◆ बफर स्टॉक:

आकस्मिक परिस्थितियों जैसे सूखा, अकाल, फसल के खराब हो जाने से अचानक तीव्र मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए सरकार भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से खाद्यान्नों का अतिरिक्त स्टाफ रखती है जिससे बफर स्टॉक कहते हैं।

बफर स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत रखे जाने वाले गेहूं तथा चावल के स्टाफ के अतिरिक्त होता है, इसका उद्देश्य खाद्यान्नों की आकस्मिक स्थिति में उपलब्धता सुनिश्चित कराना तथा मूल्य स्थिरता बनाए रखना भी होता है।

उत्तर प्रदेश से विशेष:

दिनांक 16 मार्च 2018 को कैबिनेट की बैठक में सरकार ने किसानों के हित में अहम फैसला लिया।

सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2018-2019 में मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत नई गेंहूं क्रय नीति को मंजूरी दी है।

इसमें गेहूं का समर्थन मूल्य 110 रुपये बढ़ा कर 1735 रुपये प्रति  क्विंटल कर दिया है।

उतराई हेतु प्रति बोरा 10 रुपये अतिरिक्त का प्रावधान भी किया गया है।

इसके अंतर्गत किसानों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा और 24 घण्टे इसकी फीडिंग होगी।

72 घण्टे के अन्दर ऑनलाइन माध्यम से किसानों के खाते में भुगतान होगा।

गेहूं कि खरीद 1 अप्रैल से 15 जून तक होगी।

इस वर्ष में 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है।