NiV या निपाह विषाणु

NiV या निपाह विषाणु

NiV या निपाह विषाणु

जैसा की हमें ज्ञात है कि निपाह वायरस भारत में बड़ी तेजी से पांव पसार रहा है। सबसे पहले केरल में इस विषाणु की पुष्टि होने के बाद अब यह कर्नाटक, तेलंगाना राज्यों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुका हैं। अभी तक प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह खतरनाक वायरस 14  लोगों की मौत का कारण बन चुका है एवं करीब 200 संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है। इलाज के दौरान इस विषाणु की चपेट में आए पांच चिकित्साकर्मियों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है।

निपाह वायरस संक्रमण चक्र एवं के रोग के लक्षण:

 

भारत में पहले भी हो चुका है निपाह का हमला: 

भारत में निपाह वायरस का हमला पहली बार नहीं है। देश में निपाह वायरस का का पहला मामला वर्ष 2001 के जनवरी और फरवरी माह में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में दर्ज किया गया था। इस दौरान 66 लोग निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे। इनमें से उचित इलाज न मिलने की वजह से 45 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, निपाह वायरस का दूसरा हमला वर्ष 2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में दर्ज किया गया। उस वक्त पांच मामले दर्ज किए गए थे, इसमें से पांचों की मौत हो गई थी।

कब-कब दर्ज किए गए निपाह के मामले:

1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसके एक वर्ष बाद वर्ष 1999 में सिंगापुर में निपाह वायरस के मामले दर्ज किए गए। हालांकि वायरस के उत्पत्ति स्थल कांपुंग सुंगई निपाह के आधार पर इसका नाम निपाह वायरस रखा गया। इसके बाद वर्ष 2004 में निपाह वायरस का मामला बांग्लादेश में दर्ज किया गया। इस वायरस का पहला मामला मलेशिया के पालतू सुअरों में पाया गया। इसके बाद वायरस अन्य पालतू जानवरों बिल्ली, बकरी, कुत्ता, घोड़ों और भेडों में फैलता चला गया। इसके बाद निपाह वायरस का हमला मनुष्यों पर हुआ।

यह सावधानी बरतें:

ऐसी जगहों पर भी न जाएं जहां पर चमगादड़ों का आना जाना लगा रहता हो। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर के अनुसार चमगादड़ों की लार या पेशाब के संपर्क में न आने से बचें। खासकर पेड़ से गिरे फलों को खाने से बचें। फलों को पानी में धोकर खाएं। संक्रमित सुअर और इंसानों के संपर्क में न आएं। जिन इलाकों में निपाह वायरस फैल गया है वहां न जाएं। व्यक्ति और पशुओं के पीने के पानी की टंकियों सहित बर्तनों को ढककर रखें। बाजार में कटे और खुले फल न खाएं। संक्रमित पशु के संपर्क में न आएं। खासकर सुअर के संपर्क में आने से बचें। निपाह वायरस के लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा:

जहाँ अभी तक चमगादड़ और सुअर को इसका प्रमुख कारक माना जा रहा है वहीं केरल के कोझीकोड और मलप्पुरम जिलों से चमगादड़ों से एकत्रित नमूनों की जांच में उनमें निपाह विषाणु की उपस्थिति नहीं पायी गई। इसकी पुष्टि केंद्रीय मेडिकल टीम द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय को शनिवार (26/05/2018) जारी एक रिपोर्ट में की। केंद्रीय मेडिकल टीम ने विभिन्न जगहों से कुल 21 नमूने एकत्रित किए थे जिसमें से सात चमगादड़, दो सूअर, एक गोवंश और एक बकरी या भेड़ से था। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक निपाह विषाणु फैलने में चमगादड़ और सूअर के मूल स्रोत होने की पुष्टि नहीं हुई है। इन नमूनों को भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया था। अधिकारी ने कहा, इन नमूनों में उन चमगादड़ों के नमूने भी शामिल थे जो कि केरल में पेराम्बरा के उस घर के कुएं में मिले थे जहां शुरूआती मौत की सूचना मिली थी। इन नमूनों में निपाह विषाणु पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारों की सलाह:

वैज्ञानिकों व चिकित्सां विशेषज्ञों का कहना है यदि बायोसिक्योरिटी को सख्त कर दिया जाए, तो वायरस को आने से रोका जा सकता है। गुरू अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी के डीन कॉलेज ऑफ वेटरनरी डॉ. प्रकाश बराड़ के अनुसार बायोसिक्योरिटी का मतलब बायोलॉजिकल मटीरियल को फैलने से रोकना होता है। निपाह वायरस भी बायोलॉजिकल मटीरियल में आता है। यदि प्रभावित क्षेत्र के लोग बाहर न जाएं या बाहर के लोग प्रभावित क्षेत्र में न जाए, प्रभावित क्षेत्र किसी भी चीज को फिर चाहे वह फल, सब्जियां व अन्य तरह के खाद्य पदार्थ को दूसरी जगहों पर जाने से रोक दिया जाए तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। उनका कहना है कि यह वायरस किसी भी चीज के जरिए मूवमेंट कर सकता है। फिलहाल लोग प्रभावित राज्य या जगह के आसपास में यात्रा करने से बचना चाहिए। गर्मियों के दिनों में बहुत से लोग छुट्टियां बिताने के लिए दक्षिण भारत व समुद्री तटों की यात्रा जाते हैं। इसके अलावा प्रभावित राज्यों से आने वाले फलों के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि खजूर व नारियल के पेड़ के पास चमगादड़ का आना-जाना रहता है। ऐसे में लोग कटे-फटे खजूर खाने से भी बचना चाहिए।

राज्यों में हाईअलर्ट:

बिहार, हरियाणा और सिक्किम में इस खतरनाक वायरस को हाईअलर्ट जारी किया गया। इसके साथ ही लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के अलावा अस्पातालों, होटलों आदि में विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिन राज्यों  में इस वायरस का प्रकोप फैला हुआ है वहां से आने वाले लोगों पर निगाह रखी जा रही है। इसको लेकर राज्य  सरकारों ने अपने यहां पर एडवाइजरी भी जारी की है। केरल सरकार ने प यर्टकों को कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड और कन्नूर जिलों की यात्रा न करने की सलाह दी है। एडवाइजरी के अनुसार फिलहाल इन जगहों पर निपाह वायरस फैलने का खतरा सबसे ज्यादा बना हुआ है। इस देखते हुए आसपास के राज्यों समेत खासतौर पर पर्यटकों को सलाह दी गई है।

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